भोपाल। आप विश्वास करें या न करें पर भोपाल में आस्था का एक ऐसा केंद्र भी है, जहां कुछ लोग नहीं आ पाते, लेकिन उनकी मनोकामना जरूर पूरी हो जाती है। नेहरू नगर में अर्जीवाले हनुमानजी के नाम से प्रसिद्ध है यह मंदिर। कई बच्चे जो पढ़ाई-लिखाई के लिए बड़े शहरों में चले गए हैं, लेकिन उनकी आस्था आज भी अर्जीवाले हनुमानजी में है। इसके अलावा कई लोग जो बाहर नौकरी कर रहे हैं वे भी इस मंदिर तक नहीं पहुंच पाते, लेकिन वे हनुमानजी तक अपनी मनोकामना पहुंचाने के लिए सोशल मीडिया का सहारा लेते हैं।
स्थानीय लोग बताते हैं कि पहले इस मंदिर में चिट्ठी और पत्रों के जरिए भगवान के चरणों में मुराद के लिए अर्जी लगाई जाती थी। अब आधुनिक दौर में लोगों की श्रद्धा भी सोशल मीडिया पर उमड़ पड़ी है। समय बचाते हुए यह लोग अपने सगे-संबंधियों के जरिए या सोशल मीडिया और वाट्सएप के अर्जी मैसेज कर देते हैं। उनके रिश्तेदार या मंदिर के पुजारी वह मैसेज भगवान की मूर्ति के समक्ष पढ़ देते हैं।
कई वर्षों से है लोगों की आस्था
नेहरू नगर स्थित अर्जी वाले हनुमान मंदिर के पुजारी पं. नरेन्द्र दीक्षित बताते हैं कि यहां वर्षों से लोग अपनी मन्नत के लिए दरबार में अर्जी लगाने आ रहे हैं। इनमें से कई भोपाल से बाहर रहने चले गए हैं। कोई बेंगलूरु, पुणे, मुंबई तो कोई दिल्ली, हिमाचल, पंजाब में बस गया है। लेकिन, भावनाओं के साथ वे इस मंदिर के साथ आज भी जुड़े हुए हैं। आप भी यदि पूरी श्रद्धा के साथ हनुमानजी से प्रार्थना करेंगे तो आपकी भी मनोकामना पूरी हो जाएंगी।
WHATSAPP पर आई पहली अर्जी
पंडितजी बताते हैं कि तीन साल पहले वाट्सअप पर पहली बार अर्जी एक राहुल गुप्ता नामक भक्त ने लगाई थी। पहले तो हम भी हैरान रह गए थे, लेकिन बच्चे की आस्था थी, तो भगवान की मूर्ति के समक्ष यह संदेश पढ़कर सुना दिया। इसके बाद उसके कई परिचितों ने भी इसी प्रकार से अर्जियां लगाना शुरू कर दिया। यदि कोई भक्त दूसरे शहर में अस्पताल में भर्ती है, तो वह फोन पर भी जल्द स्वस्थ होने की कामना हनुमानजी से करते हैं। पं. दीक्षित के अनुसार कई परिजनों ने अस्पताल में भर्ती मरीजों को मंदिर के पूजन और आरती का वीडियो दिखाया तो उनके स्वास्थ्य में अपेक्षाकृत ज्यादा लाभ मिला। जिन्हें भी अपनी मनोकामना व्यक्त करना हो वे हनुमानजी के 9827331604 नंबर पर वाट्सअप कर सकते हैं। उनकी यह अर्जी भगवान के समक्ष पढ़कर सुनाई जाएगी।
हनुमानजी को सुनाते हैं संदेश
मंदिर में आने वाले भक्त सफेद कागज पर अर्जी लिखकर नारियल में नाड़े से बांधकर भगवान के चरणों में अर्जी लगाते हैं। जबकि अन्य शहरों के भक्त संदेश को टाइप कर वाट्स एप के जरिए भी पंडितजी के मोबाइल पर भेजते हैं। इसके बाद पंडितजी भक्त के इस संदेश को हनुमानजी की प्रतिमा के सामने पढ़कर सुनाते हैं। भक्तों की आस्था है कि इससे उनके मन को शांति मिलती है और मनोकामना भी पूरी हो जाती है।
हनुमानजी के कान में लगाते हैं मोबाइल
यही प्रक्रिया Facebook के जरिए भी दोहराई जाती है। इस पर आने वाले संदेशों को भी भगवान को सुनाया जाता है। वहीं कई भक्तों के पंडितजी के मोबाइल पर आते हैं और कहते हैं कि भगवान को अपनी समस्या सुनाना चाहते हैं, तो वे अपना मोबाइल भगवान के कानों में लगा देते हैं।
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