ग्वालियर। वन विभाग के अफसरों ने अवैध उत्खनन कर रहे पत्थर माफिया को आधी रात को घेरने की प्लानिंग बनाई थी, लेकिन खबर लीक हो गई। रात 2 बजे टीम जब मौके पर पहुंची तब तक खनन माफिया और उनके लोग सामान समेटकर भाग गए और मौके पर सिर्फ फर्शी निकालने के औजार मिले। माफिया की तलाश में टीम ने आठ घंटे तक रेंज में सर्चिंग की, लेकिन कुछ नहीं मिला।
वन विभाग के वरिष्ठ अफसरों के निर्देश पर गुरुवार-शुक्रवार की रात करीब दो बजे तिघरा क्षेत्र की रेंजर ज्योति छाबरिया, लखनपुरा वन चौकी, वीलपुरा चौकी, छोड़ा चौकी और घाटीगांव गेम रेंज के वन रक्षकों के साथ घेराबंदी के लिए तिघरा रेंज के लखनपुरा वन चौकी क्षेत्र के बीट झाला में कार्रवाई के लिए निकलीं, लेकिन इसकी खबर वहां पत्थर का अवैध उत्खनन करने वालों तक पहुंच गई और वे टीम पहुंचने से पहले ही सामान समेटकर भाग गए।
आठ घंटे चली कार्रवाई
कार्रवाई के लिए वन विभाग की टीम ने रात 10 बजे तैयारी शुरू की। इसके लिए दो टीम गठित की गईं। एक टीम तिघरा गेम रेंज की बनाई गई। इस टीम के साथ पुलिस बल भी था। दूसरी टीम घाटीगांव गेम रेंज की निकाली। रणनीति के तहत दोनों टीमों द्वारा माफियाओं को घेरकर रंगे हाथों पकडऩा था। मौके पर कोई नहीं मिलने पर टीम ने जंगल में सुबह तक तलाश की, लेकिन कुछ नहीं मिला। कार्रवाई करीब आठ घंटे तक चली।
कुछ अफसरों की भूमिका संदिग्ध
सोन चिरैया अभयारण्य में अवैध उत्खनन रोकने के लिए प्रदेश सरकार ने निर्देश दिए हैं। जिले के अधिकारी भी अवैध उत्खनन पर शिकंजा कसने के लिए लगातार निर्देशित कर रहे हैं, इसके बाद भी तिघरा गेम रेंज में सफेद पत्थर निकाला जा रहा है। यहां अवैध खनन रोकने अब तक हुई कार्रवाई सिर्फ दिखावा साबित हुई है। इसमें कुछ अफसरों की भूमिका संदिग्ध नजर आ रही है। यही कारण है कि वन मंडल कार्यालय में खनन माफिया पर कार्रवाई की तैयारी की खबर उन तक पहुंच रही है।
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