श्योपुर,
श्योपुर जिले में आस्था के प्रतीक ग्राम जैनी के क्षेत्रपाल बाबा मंदिर पर यूं तो लोगों की गहरी आस्था है, लेकिन यहां मंदिर निर्माण के लिए भी ग्रामीणों ने अनूठी पहल की है। जिसमें जैनी गांव के किसान अपने खेतों का सरसों का भूसा बेचकर भव्य मंदिर बनवा रहे हैं और बीते 12 सालों में किसानों ने लगभग एक करोड़ रुपए से भी अधिक का भूसा बेचकर अभी तक मंदिर को भव्य बना दिया है।
उल्लेखनीय है कि ग्राम जैनी के श्री क्षेत्रपाल बाबा की मान्यता न केवल श्योपुर जिले में बल्कि अन्य जिलों में भी खूब है। हालांकि प्रत्येक रविवार यहां बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं। यही वजह है मंदिर को भव्य बनाने के लिए भी ग्रामीण बीते एक दशक से प्रयासरत हैं। इसके लिए ग्रामीणों ने निर्णय लिया कि जैनी के हार में सरसों खूब होती है और उसका भूसा पशु भी नहीं खाते, लिहाजा इसे एक जगह एकत्रित कर बाहर के व्यापारियों संपर्क कर उसे बेचा जाए। वर्ष 2008 में किसानों ने पहली बार अपना-अपना भूसा एक निर्धारित स्थल पर एकत्रित किया और बोली लगाकर बेच दिया और आई राशि समिति के माध्यम से मंदिर निर्माण में लगा दी। तभी से सिलसिला शुरू हुआ और हर साल किसान अपने सरसों फसल कटाई के बाद भूसा दान कर देते हैं, जिसे समिति बड़े व्यापारियों को बेचकर राशि जुटा लेती है। बीते 11 साल में समिति ने लगभग एक करोड़ रुपए के आसपास जुटाए और वर्तमान में भव्य मंदिर बन चुका है, जहां श्रद्धालुओं के लिए कार्यक्रम करने व ठहरने के लिए भी सुविधाएं जुटाई है, साथ ही क्षेत्रपाल बाबा की प्रतिमाओं के ऊपर 8 0 फीट ऊंचा शिखर भी बनाया गया है।
इस वर्ष तीन लाख का बिका भूसा
इसबार भी ग्रामीणों ने क्षेत्र से सरसों का भूसा इक_ा किया है, जिसकी नीलामी बीते रोज हुई है। हालांकि गत वर्ष के मुकाबले इस बार भूसे के दाम तीन गुना कम मिले हैं,लेकिन बताया जा रहा है कि इस बार भी लगभग 3 लाख रुपए की आय होगी, जिसे मंदिर निर्माण में लगाया जाएगा।
जारी है सिलसिला
ग्रामीणों द्वारा पहल की जाकर हर साल सरसों का भूसा एकत्रित कर बेचा जाता है। और इससे मिलने वाली राशि को मंदिर निर्माण में लगाया जाता है। ये सिलसिला बीते 11-12 सालों से चल रहा है।
रामचरण मीणा
अध्यक्ष, श्री क्षेत्रपाल बाबा मंदिर समिति जैनी
बीते 12 सालों में भूसा बेचकर एकत्रित राशि
वर्ष एकत्रित राशि
2008 एक लाख 61 हजार
2009 तीन लाख 21 हजार
2010 सात लाख 71 हजार
2011 12 लाख 51 हजार
2012 27 लाख 61 हजार
2013 11 लाख 81 हजार
2014 चार लाख 05 हजार
2015 तीन लाख 92 हजार
2016 सात लाख 16 हजार
2017 आठ लाख 23 हजार
2018 10 लाख
2019 तीन लाख(संभावित)
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