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Saturday, April 20, 2019

सर्वे में मिले थे अतिक्रमण, 943 में से 141 मुनारें थीं गायब, कार्रवाई न करने से बढ़ गए कब्जे

राजधानी की लाइफलाइन बड़े तालाब को बचाने के लिए लंबे समय से प्रयास चल रहे हैं, लेकिन हर बार कागजी सर्वे के बाद मामला ठंडा पड़ जाता है। तीन साल पहले भी जिला प्रशासन और नगर निगम की टीम ने एनजीटी क आदेश पर बड़े तालाब का सर्वे किया था।

उस समय 4 टीमों ने सर्वे कर 943 में से 802 मुनारें तो तलाशी, लेकिन 141 मुनारें नहीं तलाश पाए। अतिक्रमण भी 400 से ज्यादा बताया था। ये रिपोर्ट एनजीटी में पेश की गई, चंद अतिक्रमण हटाए गए, लेकिन बड़े स्तर पर कुछ नहीं हुआ। इसी का परिणाम है कि बड़े तालाब में लगातार कब्जे बढ़ते गए। इस बार के सर्वे रिपोर्ट में अभी तक 600 से ज्यादा छोटे-बड़े अतिक्रमण सामने आ चुके हैं। मुनारें भी गायब मिल रही हैं।


बड़े तालाब के फुल टैंक लेवल (एफटीएल) से 50 मीटर दायरे में चल रहे सर्वे में बैरागढ़ वृत्त के तहसीलदार दीपक पांडे और उनकी टीम जांच कर रही है। तहसीलदार का कहना है कि सोमवार को रिपोर्ट बनाकर कलेक्टर को प्रस्तुत की जाएगी। इधर अभी तक की जांच में खानूगांव में 55 अतिक्रमण, हलालपुरा में 8, बोरवन में 400 के करीब, बहेटा का में 100, भैंसाखेड़ी में 10 से ज्यादा अतिक्रमण दिखाई दिए हैं। संजय नगर में 50 मीटर के दायरे में नपती शुरू की तो कुछ झुग्गियां पचास मीटर के दायरे में आईं हैं। अगर जल्द ही इन्हें नहीं रोका गया तो आने वाले दिनों में यहां झुग्गियों की संख्या और बढ़ जाएगी।

अतिक्रमण में ये क्षेत्र हैं ज्यादा प्रभावित-

- खानूगांव क्षेत्र नेताओं, सामाजिक कार्यकर्ताओं, रसूखदारों के निर्माण हैं। यहां मैरिज गार्डन से लेकर मकान और शैक्षणिक संस्थान बनाए गए हैं।
- बैरागढ़ क्षेत्र में हेल्थ सेंटर की अनुमति पर मैरिज गार्डन खोल दिए गए हैं। बहेटा, भैंसाखेड़ी, बोरवन एरिया में भी तालाब के केचमेंट में बड़ी संख्या में निर्माण हैं।

- नीलबड़ एरिया व सूरज नगर एरिया में भी केचमेंट एरिया में खेती के साथ ही बड़ी संख्या में निर्माण हैं।

ये थे आदेश, ये हुआ पालन
एनजीटी की सेंट्रल बेंच ने जुलाई 2015 में तालाब का सीमांकन करने और मुनारे लगाने के आदेश दिए थे। इसके बाद जिला प्रशासन ने 943 मुनारों में 802 मुनारें ही तलाश पाए थे। इसमें से 337 मुनारे पानी में डूबी मिली थीं, वहीं 141 मुनारें गायब थीं।

तालाब से अतिक्रमण रोकने यह है नियम -

- भोपाल विकास योजना 2005 में प्रावधान किया गया है कि बड़े तालाब के किनारे फुल टैंक लेवल (एफटीएल) से न्यूनतम 50 मीटर दूर तक का क्षेत्र खुला रखा जाएगा। यहां किसी तरह का निर्माण नहीं किया जा सकता। लेकिन जांच में यहीं अतिक्रमण पाया जा रहा है।

- कलियासोत, शाहपुरा, केरवा, हथाईखेड़ा, लहारपुर, छोटा तालाब के किनारे 33 मीटर का क्षेत्र खुला रखा जाएगा। यानी इस दायरे में किसी तरह का निर्माण की अनुमति नहीं होगी।


अभी अतिक्रमण चिन्हित करने के लिए सर्वे चल रहा है, रिपोर्ट के बाद की कुछ कहा जा सकता है।

सुदाम खाडे, कलेक्टर


तीन साल पहले जो सर्वे हुआ था अगर उसी समय रिपोर्ट पर अमल कर कार्रवाई की जाती तो अतिक्रमण को रोका जा सकता था, लेकिन कार्रवाई न करने से स्थिति और खराब हो रही है।

सुभाष सी पांडेय, पर्यावरणविद



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