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Saturday, April 20, 2019

थाने के पास किराए के मकान में छप रहे थे नकली नोट, पुलिस ने ऐसे किया गिरफ्तार

भोपाल. सागर पुलिस ने भोपाल के अशोका गार्डन थाने के पास किराए का मकान लेकर नकली नोट छापने वाले मेडिकल स्टोर संचालक को गिरफ्तार किया है। आरोपी 200, 100, 50 के नकली नोट छापकर सागर में खपा रहा था। हाल ही में उसे देवरी में शराब दुकान पर नकली नोट चलाते हुए शराब दुकान के कर्मचारियों ने पकडकऱ पुलिस को सौंपा था।

पूछताछ में उसने बताया कि वह भोपाल में अपने कमरे पर नोटों की प्रिंटिंग करता है। सागर पुलिस ने उसकी निशानदेही पर उसके कमरे से कलर प्रिंटर, छह हजार रुपए नकली नोट समेत नोट तैयार करने के अन्य उपकरण जब्त किए हैं। आरोपी पिछले तीन चार महीने से नोट खपा रहा था। अशोका गार्डन पुलिस को इसकी भनक तक नहीं लगी।

सागर एसपी अमित सांघी ने बताया कि मूलत: तिलकगंज वार्ड देवरी, सागर निवासी 28 वर्षीय सतीश दुबे को गिरफ्तार किया गया है। सतीश फार्मासिस्ट है। उसका अशोका गार्डन में साधना मेडिकल स्टोर है। उसने कुछ साल पहले अशोका गार्डन इलाके में रहने वाली युवती से लव मैरिज की है।

वह महीने भर पहले ससुराल में रह रहा था। महीने भर पहले पत्नी से कहासुनी होने के बाद वह अशोका गार्डन थाने के सामने अपने चाचा के मकान में किराए का कमरा लेकर रहता था। पुलिस को पूछताछ में उसने बताया कि वह नोट को स्कैन करने के बाद उन्हें अच्छी क्वालिटी के पेपर पर कलर प्रिंटर की मदद से प्रिंट करता था।

पेपर की शीट को नोट का आकार देने के लिए वह सर्जिकल औजारों का उपयोग इसलिए करता था ताकि फिनिशिंग अच्छी आए। जिससे नकली नोट की पहचान नहीं हो सके। आरोपी ने पूछताछ में बताया कि भोपाल में पकड़े जाने की अधिक संभावना थी, इसलिए वह ग्रामीण इलाकों में नोट चलाता था।

100 के 4 नोट से पकड़ाया

18 अप्रेल को आरोपी देवरी में शराब दुकान पहुंचा। 100 के चार नोट देकर शराब खरीदी। शराब लेकर वह आगे बढ़ा ही था कि दुकान के मैनेजर को उसके दिए नोट पर संदेह हुआ। मैनेजर ने नोट उलट-पलटकर देखा तो नकली समझ में आया। मैनेजर ने तुरंत ही सतीश को दौडकऱ पकड़ा। इसके बाद पुलिस के हवाले कर दिया।

धंधे में व्यस्त व्यापारियों के पास खपाई रकम

टीआई आरएस ठाकुर ने बताया कि आरोपी नकली नोट सागर में ही पहुंचकर चलाता था। इसके लिए वह उन व्यापारियों को टारगेट करता था जिनके पास ग्राहकों की भीड़ होती थी। व्यस्तता की वजह से व्यापारी उसकी दी हुई नकली नोट को चेक नहीं करता था। वह दो हजार और पांच सौ के नकली नोट इसलिए नहीं छापता था क्योंकि व्यापारी इन नोटों को चेक करते हैं। ऐसे में उसकी करतूत पकड़ी जा सकती थी।



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