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Friday, April 19, 2019

दिग्विजय के दांव पर साध्वी प्रज्ञा ठाकुर का पेंच, अब इस रणनीति पर होगी राजनीति...

भोपाल. लोकसभा के रण में भोपाल सीट पर पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह और साध्वी प्रज्ञा ठाकुर के आमने-सामने आने के बाद सारे समीकरण बदल गए हैं। एक ओर दिग्विजय सिंह आधे से ज्यादा लोकसभा क्षेत्र को कवर कर चुके हैं, तो दूसरी ओर साध्वी प्रज्ञा के लिए राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ मैदान में उतर आया है। पूरा चुनाव अब धार्मिक भावनाओं के ईद-गिर्द सिमटता दिख रहा है,

जिसके चलते भोपाल के स्थानीय मुद्दे हाशिये पर जाने का अंदेशा बन गया है। 30 साल भाजपा का गढ़ बनी भोपाल सीट पर सीएम कमलनाथ ने दिग्विजय को उतारा, तो भाजपा ने अचानक से प्रज्ञा को सामने किया है। दोनों प्रत्याशियों की ताकत-कमजोरी, समीकरण और रणनीति बिलकुल जुदा है। जानिए किसके तरकश में कौन से चुनावी तीर। पेश है जितेन्द्र चौरसिया की रिपोट...

क्या चुनाव की अगली चालें भोपाल की राजनीति से होंगी तय

दिग्विजय के पास कद और अनुभव का बल

ताकत - दस साल सीएम रहे। बड़ा नेटवर्क। पूरे क्षेत्र को जानते हैं। चुनाव का लम्बा अनुभव। अधिकतर नेता साथ में। चार मंत्रियों का सक्रिय साथ। भाजपा नेताओं से बेहतर संबंध।

कमजोरी - हिन्दुत्व विरोध की पुरानी छवि। विवादित बयान। बड़े नेताओं से पटरी नहीं बैठना। भोपाल सीट पर चुनाव लडऩे का अनुभव नहीं।

खतरा इनसे - पार्टी में बड़े नेताओं की राजनीति में घिरना। पूर्व केंद्रीय मंत्री सुरेश पचौरी का भोपाल क्षेत्र होने से उनको संभालना।

मुद्दों के ऐसे हाल: विजन डॉक्यूमेंट जारी करने का ऐलान। युवाओं व प्रबुद्धजन से सुझाव लिए। भोपाल की मौजूदा बड़ी संस्थाओं को कांग्रेस का बताया।

कांग्रेस की ऐसी रणनीति

सॉफ्ट हिन्दुत्व टारगेट। मंदिर-मंदिर गए। मंत्री आरिफ अकील व विधायक आरिफ मसूद को अधिकतर मौकों पर दूर रखा। नर्मदा परिक्रमा वर्षगांठ पर बड़ा कार्यक्रम। भोपाल डायलॉग से प्रबुद्ध वर्ग को साधा। 5 मई संसदीय क्षेत्र में पदयात्रा।

देर से आईं प्रज्ञा लेकिन संघ की ताकत साथ

ताकत - कट्टर हिन्दुवादी छवि। जेल व प्रताडऩा के मुद्दे पर इमोशनल पहलू। आक्रामक भाषण शैली। आरएसएस के पूरे नेटवर्क का साथ। सभी की रजामंदी से मैदान में।

कमजोरी - विवादित व कट्टर छवि को नुकसान। देरी से नाम की घोषणा। स्वास्थ्य कारणों से सक्रियता में कमी। संगठन पूरी तरह साथ नहीं।

खतरा इनसे - स्थानीय नेता बाबूलाल गौर, आलोक संजर, आलोक शर्मा, तपन भौमिक व अन्य दावेदारों का साथ कितना मिलेगा इस पर संशय।

मुद्दों के ऐसे हाल: भोपाल के स्थानीय मुद्दों की बजाए फिलहाल आतंकवाद, पाकिस्तान व धर्म के सहारे दिग्विजय पर हमला। अभी विजन डॉक्यूमेंट पर फोकस नहीं।

भाजपा की ऐसी रणनीति

आरएसएस ने बड़े नेताओं को साधा। धार्मिक आधार पर धुव्रीकरण की रणनीति। पूर्व सीएम शिवराज सिंह चौहान को भितरघात थामने व समन्वय के लिए लगाया। मौजूदा सांसद आलोक संजर को साथ रखकर नाराजगी थामने की कोशिश।



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