राधेश्याम दांगी, भोपाल. ई-टेंडर घोटाले में गुजरात की कंपनियों को ठेके की दलाली के आरोप में गिरफ्तार मनीष खरे की लाइफ स्टाइल भी पांच सितारा से कम नहीं है। वह 2012-13 से भाजपा नेताओं, बड़े बिल्डरों और कुछ आईएएस अफसरों के संपर्क में रहा। इसके बाद मनीष का आर्थिक ग्राफ तेजी से बढऩे लगा। जैसे ही मनीष के पास पैसे आना शुरु हुए, वह सोने का शौक करने लगा। महंगी कारें, जमीन, भवन में निवेश करने लगा। ओरछा के पास रिसोर्ट बनाने के लिए कई एकड़ जमीन खरीदी है।
वहीं, एमपी नगर के कुछ भवनों में बड़ी रकम निवेश कर रखी है। चुनाभट्टी में 2400 वर्ग फीट का आलिशान घर बनाया, जिसमें मुंबई से आर्किटेक्ट बुलाया गया। राजस्थान से मिस्त्री व कारीगर और सामग्री बुलाई गई। इंपोर्टेड मटेरियल से घर सजाया गया। भव्य बंगला और उसकी लाइफ स्टाइल देखकर लोग उसके पास कई तरह के काम लेकर पहुंचते थे। रेलवे में भी मनीष की गहरी पैठ है। रेलवे के सॉफ्टवेयर में भी वह अच्छी पकड़ रखता है।
यही नहीं, मनीष को कारों का भी बहुत शौक है, उसके पास रेंज रोवर, बलेनो, आर्टिगो, सियाज, सेंट्रो गाडिय़ां हैं। मनीष दिल्ली जाया करता था तो वहां भी कार मौजूद मिलती थी। दिलचस्प बात यह है कि 2012-13 के बाद अचानक मनीष की लाइफ स्टाइल में बदलाव आने और महंगे शौक के कारण एक फाइनेंसर ने प्राइवेट डिटेक्टर की मदद से मनीष की रैकी भी करवाई थी। इसमें पता चला था कि उसके चुनाभट्टी वाले घर अक्सर इंदौर से काले रंग की बीएमडब्ल्यू गाडिय़ां सुबह आती थीं। इसके बाद वह अरेरा कॉलोनी स्थित एक कार्यालय पहुंचता था, इसके बाद मनीष की दैनिक दिनचर्या व काम शुरु होता था।
नैनीताल के स्कूल में बच्चों का दाखिला
मनीष ने अपने बेटे स्वयं और कलश का नैनीताल के शेरवुड कॉलेज में दाखिला करवाया। इसकी मोटी फीस होती है। लेकिन बच्चों का मन नहीं लगा तो उन्हें वापस बुला लिया। फीस की कोई चिंता नहीं की। वह खुद सोने की मोटी चेन, अंगुठियां आदि का खुब शौक करता था। वहीं, वह दिल्ली के बड़े-बड़े होटलों में ठहरता था और गुजरात, राजस्थान, दिल्ली और अन्य राज्यों की बड़ी-बड़ी कंपनियों से टेंडर की डीलिंग करता था। गुजरात की सोरठिया वेजली रत्ना कंपनी को दिल्ली की एक होटल में रिप्रेजेंटेशन दिया था कि वह उसे टेंडर कैसे दिलवाएगा।
ऐसे बढ़ते गया ग्राफ
- करीब 1996-7 में एक निजी कंपनी में आफिस ऑटोमिशन का काम शुरु किया।
- 2012-13 में कामधेनू टॉवर में एक सर्विस इंजीनियर के तौर पर काम शुरु किया।
- 2014-15 में कोलार के फॉच्र्यून एंक्लेव में एक नया ऑफिस शुरु किया। - 2015 में मेट्रो प्लाजा में ऑफिस शुरु किया, यहां उसने माइल स्टोन बिल्डर्स एंड डेवलपर्स, माइल स्टोन इंपोर्ट एंड एक्सपोर्ट, माइल स्टोन मार्केट डेवलपर डेवलपर नामक तीन कंपनियां बनाई।
- इस दौरान मनीष शहर के कुछ बड़े बिल्डरों के संपर्क में रहकर काम करने लगा। सूत्रों का कहना है कि 2013 के विधानसभा और 2014 के लोकसभा चुनाव में मनीष ने भाजपा के उम्मीदवारों को पार्टी फंड का पैसा पहुंचाने का काम भी किया है।
- इसके बाद से मनीष का कद बढ़ते गया। 2013 के चुनाव के पहले मनीष ने मुख्यमंत्री के हेलीकॉप्टर से दिल्ली जाना-आना किया। एमपी भवन में नेताओं से संपर्क में रहा।
- भाजपा सरकार में सीएम हाउस और एक बड़े बिल्डर से नजदीकियों का लाभ उठाया। चुनाव में टिकट दिलाने तक के लिए लाइजनिंग का काम किया।
- कुछ बड़े नेताओं से सीधे संपर्क होने के कारण मनीष को लोग बड़ा आदमी मानने लगे और वह कुछ आईएएस अफसरों के तबादलों, उनके पैसे का निवेश का काम भी करता था।
प्राइवेट कांट्रेक्टर होने के कारण आय से अधिक संपत्ति की जांच हमारे दायरे में नहीं आती है। जब तक यह साबित न हो जाए कि यह संपत्ति मनी लांड्रिंग, अवैध हथियार, नारकोटिक्स आदि से अर्जित की गई हो हम इसकी जांच नही कर सकते हैं।
- केएन तिवारी, डीजी ईओडब्ल्यू
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