मध्यप्रदेश में नाराज किसान किसानों को मनाने हो रहे क्या जतन, पढ़ें पूरी खबर - Hindi Breaking Newz T20 For

Breaking

Home Top Ad

Responsive Ads Here

Post Top Ad

Responsive Ads Here

Sunday, June 2, 2019

मध्यप्रदेश में नाराज किसान किसानों को मनाने हो रहे क्या जतन, पढ़ें पूरी खबर

भोपाल. विधानसभा चुनाव में किसानों के दम पर सरकार बनाने वाली कांग्रेस के लिए लोकसभा चुनाव में इस वोटबैंक का खिसकना चिंता का सबब बन गया है। कुपित किसानों ने चुनाव बाद आंदोलन भी छेड़ दिया। मुख्यमंत्री कमलनाथ ने जैसे-तैसे किसानों को संभालकर आंदोलन वापस कराया, लेकिन उनकी नाराजगी कांग्रेस में सत्ता-संगठन के लिए सिरदर्द बन गई है। आगामी दिनों में निकाय और पंचायत चुनाव हैं, लेकिन किसान न कर्जमाफी पर संतुष्ट है और न फसल के दामों पर। भाजपा भी किसानों को साथ लेकर आंदोलन छेडऩे की तैयारी कर रही है। ऐसे में कांग्रेस सरकार ने डैमेज कंट्रोल के लिए तीन स्तरों पर काम शुरू कर दिया है।
- आंदोलन से प्रेशर पॉलीटिक्स
किसानों ने आंदोलन के जरिए कांग्रेस सरकार पर प्रेशर पॉलीटिक्स का दांव आजमाया। किसान यूनियन ने आंदोलन शुरू किया तो राष्ट्रीय किसान मजदूर महासंघ ने भी आंदोलन का ऐलान कर दिया। मुख्यमंत्री ने मोर्चा संभालते हुए दोनों संगठनों को मना लिया, लेकिन किसान प्रतिनिधियों ने दो टूक कहा कि आंदोलन स्थगित हो रहा है, रद्द नहीं। यानी किसानों की मांगें पूरी नहीं होती हैं तो फिर आंदोलन शुरू हो जाएगा। अब कांग्रेस सरकार दबाव में है कि किसानों को किस प्रकार संतुष्ट करके आंदोलन की जड़ को खत्म किया जाए।
- तीन चरणों में ऐसे काम होगा
कांग्रेस ने किसानों की नाराजगी थामने के लिए अलर्ट मोड अपनाया है। कांग्रेस ने पहले चरण में मंत्री और विधायकों को कर्जमाफी सहित किसानों के अन्य मुद्दों पर समझाइश देने के लिए कहा है। दूसरे चरण में कृषि विभाग को अलर्ट किया है कि किसानों की फील्ड की समस्याएं तुरंत खत्म हों। इसके तहत मंडियों में खरीदी-बिक्री को लेकर शिकंजा कसा है। तीसरे चरण में कर्जमाफी को फोकस किया है। अभी करीब 36 लाख किसानों को कर्जमाफी का फायदा और देना है। उस पर भाजपा के कर्जमाफी पर कैंपेन का काउंटर भी कांग्रेस सत्ता व संगठन को करना है। इसे लेकर विभाग व संगठन के स्तर पर कदम उठाए जा रहे हैं।

- रेंडम जांच और सख्त कार्रवाई
प्रदेश सरकार ने मंडियों में किसानों की समस्याओं को खत्म करने अभियान चलाना भी तय किया है। कृषि विभाग ने सभी कलेक्टरों को आदेश दिए हैं कि किसान को मंडी में फसल बिक्री वाले दिन ही नकद भुगतान नहीं किया जाता है तो प्रतिदिन एक फीसदी ब्याज देना अनिवार्य होगा। उस पर यदि पांच दिन तक भुगतान नहीं होता है तो व्यापारी का लाइसेंस रद्द किया जाएगा। इसका क्रियान्वयन जांचने के लिए रेंडम जांच की जाएगी। इसमें यदि कोई किसान मंडी से बिना भुगतान लिए लौटता मिलता है तो उसे तुरंत रोककर भुगतान कराना होगा। ऐसा नहीं होने पर व्यापारी का लाइसेंस रद्द किया जा सकेगा।
- भाजपा की बड़े आंदोलन की तैयारी
कांग्रेस की बढ़ती मुश्किलों के बीच भाजपा ने किसानों को साथ लेकर बड़े आंदोलन की तैयारी शुरू कर दी है। भाजपा ने इसके लिए किसान मोर्चे के प्रतिनिधियों को फील्ड में सक्रिय कर दिया है। पार्टी का फोकस कर्जमाफी पर कांग्रेस सरकार की विफलता है। इसमें कर्जमाफी की पात्रता रखने के बावजूद इसका फायदा न मिलने वाले किसानों को साथ लेकर भाजपा आंदोलन करेगी। भाजपा की कोशिश है कि किसानों के बड़े आंदोलन के जरिए सूबे में कांग्रेस को विपक्ष की ताकत दिखाई जाए। साथ ही निकाय और पंचायत चुनाव के लिए बड़ा प्लेटफार्म भी तैयार कर लिया जाए।
- सियासत की धूरी क्यों हैं किसान
सूबे में 74 फीसदी आबादी किसानों की है। इस लिहाज से किसान सबसे बड़ा वर्ग है, जिसे वोटबैंक के लिए राजनीतिक पार्टियां साधती हंै। सूबे की 230 विधानसभा सीटों में से करीब 200 सीटें किसान बाहुल्य हैं। जब जून 2017 में किसान आंदोलन हुआ तो मंदसौर में पुलिस फायरिंग में छह किसानों की मौत हो गई। इसके बाद से ही किसानों पर लगातार सियासत गर्म रही। नवंबर 2018 में चुनाव आए तो कांग्रेस ने किसान कर्जमाफी के दांव से सत्ता पलट दी। कांग्रेस ने सरकार बनाई, लेकिन मई 2019 में जब लोकसभा चुनाव हुए तो यह वोटबैंक कांग्रेस से फिसल गया। लोकसभा में सूबे की 29 में से 28 सीटों पर भाजपा ने कब्जा जमा लिया।

किसानों की कर्जमाफी वापस शुरू की जा रही है। किसानों ने आंदोलन वापस ले लिया है। भाजपा ने किसानों को भ्रमित किया था। हमारी सरकार किसानों के हित के लिए हर संभव प्रयास करेगी।
- सचिन यादव, कृषि मंत्री



from Patrika : India's Leading Hindi News Portal http://bit.ly/2I86XuQ

No comments:

Post a Comment

Post Bottom Ad

Responsive Ads Here

Pages