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Tuesday, June 4, 2019

वायु प्रदूषण : मंडीदीप और राजधानी में कोलार की हवा सबसे अधिक जहरीली

भोपाल. प्रदूषण नियंत्रण मंडल के आंकड़ों के अनुसार वायु प्रदूषण के मामले में भोपाल प्रदेश के तीसरे सबसे प्रदूषित शहरों में शामिल है। सबसे ज्यादा प्रदूषण सिंगरौली में दर्ज हुआ है, जहां एक्यूआई 177.7 है। ग्वालियर में 143.09 तो भोपाल में एक जून को 136.7 दर्ज किया गया।

बैरागढ़ में 145, गोविंदपुरा में 132 एवं कोलार रोड में एक्यूआई 159 दर्ज किया गया। मंडीदीप में एक्यूआई 189 है, जो प्रदेश के सबसे प्रदूषित शहरों के स्तर का है। कोलार रोड प्रदेश के दूसरे सबसे ज्यादा वायु प्रदूषण वाले शहरों से अधिक प्रदूषित है।

सरकारी आंकड़ों के उलट जमीनी स्थिति और भी भयावह है। भोपाल स्थित अंतररराष्ट्रीय संस्था जीसीड (ग्लोबल अर्थ सोसाइटी फॉर एनवायरमेंटल एनर्जी एंड डवलमेंट) के मुताबिक हमीदिया रोड, एमपी नगर, नेहरू नगर से लेकर लालघाटी जैसे इलाकों में पीक आवर्स में खतरनाक वायु प्रदूषकों से लेकर पार्टिकुलेट मेटर, वाष्पशील कार्बनिक यौगिक, नॉक्स, सॉक्स, कार्बन मोनोऑक्साइड और अन्य ग्रीन हाउस गैसों की मात्रा दिल्ली स्थित के कई संवेदनशील क्षेत्रों के बराबर है।

यहां इसका संज्ञान लेने वाला नहीं है। ऐसे में वायु प्रदूषण की स्थिति बिगड़ती जा रही है। शहरी क्षेत्रों के अलावा सबसे खराब स्थिति कहीं है तो वह आदमपुर स्थित ट्रैंचिंग ग्राउण्ड है। यहां शहर का कचरा डम्प किय जा रहा है। यहां कचरे में अकसर आग लगती है। अप्रेल में प्रदूषण नियंत्रण मंडल ने यहां वायु प्रदूषण मापा था, जिसमें पीएम 2.5 और पीएम-10 खतरनाक स्तर पर था।

सिर्फ 4 मानकों को माना आधार

हवा की गुणवत्ता मापने के लिए तय 12 मानकों में से प्रदूषण नियंत्रण मंडल ने पीएम 10 और 2.5, नाइट्रोजन डाई ऑक्साइड और सल्फर डाइ ऑक्साइड का टेस्ट किया था। शहर में प्रदूषण का स्तर एक्यूआई यानी औसत पर आधारित है, जबकि मनुष्य प्रदूषण में उसी क्षमता से सांस लेता है, जितना प्रदूषण के कम रहने की अवस्था में।

हवा में सामान्य स्तर

पीएम2.5 - 60
पीएम10 - 100
एसओटू - 80
नॉक्स - 80

शहर से सटे गांव पीएम-2.5 पीएम-10
आदमपुर एमएसडब्ल्यू साइट 149.0 317.9
पड़रिया 83.6 198.7
कोलुआ खुर्द 41.7 151.2
आदमपुर बस्ती 45.7 80.8
एसओटू सभी स्थानों पर 2.0 माइक्रोग्राम प्रति क्यूबिक मीटर (24 घंटे का औसत प्रदूषण )

 

5 कारण, जिनसे बिगड़ी बड़े तालाब की सेहत

  1. तालाब दो जिलों में फैला है। सीहोर में कैचमेंट व भोपाल में एफ टीएल है। खेतों से रसायन तालाब में पहुंच रहे हैं। यहां पक्के निर्माणों के कारण पानी के बहाव का प्राकृतिक रास्ता बंद हो रहा है।
  2. तालाब के एफटीएल से 50 मीटर तक निर्माण पर रोक है। जिला प्रशासन के सर्वे में यहां 600 निर्माण मिले थे। निर्माण रोकने का जिम्मा जिला प्रशासन का है, लेकिन वो अपना काम नहीं कर पा रहा।
  3. 361 वर्गकिमी क्षेत्र में कॉलोनियां विकसित हो रही हैं। नगर निगम के सर्वे में यहां 70 अवैध कॉलोनियां मिली हैं। ऐसे में निर्माण पर तुरंत रोक लगाने के साथ ही फ ार्म हाउस की अनुमति भी शर्तों के साथ दी जाए। वीआइपी रोड पर खानूगांव से बैरागढ़ तक बॉटनिकल गार्डन, अर्बन पार्क विकसित होना जरूरी है।
  4. बड़ा तालाब लगातार प्रदूषित हो रहा है। तालाब में 14 बड़े नालों का पानी सीधे मिल रहा है। सीवेज साफ करने चार प्लान्ट लगाए हैं। अब कुछ और प्लांट लगाकर इन्हें रोकने की कोशिश की जा रही है।
  5. कैचमेंट में रासायनिक खेती से जलीय जीवों के अस्तित्व पर खतरा है। तालाब में लेड व कोलीफ ार्म जैसे हैवी मेटल के साथ 32 प्रकार खतरनाक तत्व मौजूद हैं, जो सेहत के लिए बेहद घातक हैं।


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