भोपाल। मध्यप्रदेश सहित देश के उत्तर भारत, मध्य भारत और दक्षिण भारत के कुछ हिस्सों में पड़ रही तेज गर्मी के बीच एक अच्छी खबर सामने आई है। इसके अनुसार शनिवार को यानि 8 जून को मानसून ने आखिरकार केरल में दस्तक दे दी है।
08 दिन की देरी से केरल पहुंचे मानसून के बाद यहां के तटीय इलाकों में बारिश शुरू हो गई है। मौसम विभाग के अधिकारी के मुताबिक केरल के कई हिस्सों में बारिश हो रही है। यह खबर देश के लिए अच्छी है क्योंकि बड़ा हिस्सा कृषि संकट से जूझ रहा है। साथ ही मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल सहित पश्चिम और दक्षिण भारत में कई जलाशयों का जल स्तर निम्न स्तर तक चला गया है।
इस बीच शनिवार को भी मध्यप्रदेश में विभिन्न जिलों में तेज गर्मी रही। इस दौरान अधिकतम तापमान खरगौन में 47 डिग्री तापमान दर्ज किया गया। वहीं इसके अलावा शाजापुर में 46 डिग्री जबकि रायसेन में 45.8 वहीं राजगढ़ में 45.7 डिग्री व नौगांव और खरगोन में 45.6 डिग्री के अलावा ग्वालियर मे 45.4 डिग्री, वहीं रीवा में 45.2 डिग्री और राजधानी भोपाल में 45.1 डिग्री तापमान रिकॉर्ड किया गया। वहीं मौसम विभाग ने भी रविवार को अधिकांश प्रदेश में लू की चेतावनी जारी कर दी है।
मौसम के जानकार एके शर्मा के अनुसार भोपाल में मानसून करीब 20 जून के आसपास प्रवेश करेगा। जबकि प्रदेश के कुछ जिलों में इससे पहले मानसून की बारिश शुरू हो सकती है। वहीं शर्मा का कहना है कि राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में मानसून दो से तीन दिन की देरी से पहुंच सकता है।
वहीं भोपाल के संबंध में उनका कहना है कि यहां इस बार प्री-मानसून गतिविधि कम रही। ऐसे में चक्रवात और या प्रति चक्रवात के जरिए अरब सागर और बंगाल की खाड़ी से जाे नमी मिलनी थी, उसका पूरी तरह अभाव रहा।
इसी के चलते हवा में सूखापन ज्यादा रहने से तापमान लगातार बढ़ता रहा। इसका प्रभाव मुख्य रूप से भाेपाल और उसके आसपास के इलाकाें में ज्यादा रहा। इसके अलावा अल-नीनो की वजह से भी इस बार मानसून में देरी हुई है। वहीं उन्होंने ये भी कहा कि मानसून के देरी से आने का मतलब देशभर में कम बारिश होने से नहीं है।
तेजी से आ रही है बारिश...
शर्मा का कहना है कि इस बार मानसून बहुत ही तीव्रता से आने का अनुमान है। उनके अनुसार मानसून ने जो तीव्रता केरल में दिखाई है, उससे संभावना है कि यदि मानसून की यही स्थिति बनी रही तो इस बार भोपाल में भी जमकर पानी गिरेगा। जिससे कई क्षेत्रों में पानी के भराव की समस्या उत्पन्न हो सकती है।
वहीं शर्मा के अनुसार यदि मानसून की तीव्रता में ज्यादा कमी नहीं आई तो राजधानी भोपाल में एक बार फिर वहीं हालात पैदा हो सकते हैं जो कुछ वर्ष पहले सामने आए थे, कि कुछ सड़कों पर तक नांव चलाने की नौबत आ गई थी, लेकिन ये स्थिति जुलाई में मानसून के पुन: तीव्रता पकड़ने पर आने का ज्यादा अनुमान है।
साथ ही शर्मा ये भी कहते है कि यदि मानसून दिशा भटका तो भी प्रदेश में कुछ जगह तीव्रतम वर्षा हो सकती है। उनके अनुसार हां यदि मानसून की तीव्रता में ही कमी आ गई तो जरूर बारिश में सामान्यता दिखेगी। वहीं उनका अनुमान है कि राजधानी भोपाल के क्षेत्र में भी कुछ जगहों पर आगामी कुछ दिनों जैसे 12 से 15 के बीच में हल्की या तेज बारिश हो सकती है।
जुलाई में मानसून में आएगी तेजी...
वहीं शर्मा के अनुसार 12 जून के बाद फिर से प्री-मानसून एक्टिविटी बढ़ने का अनुमान है। उनका कहना है कि लगता है इस साल मानसून जून में कमजोर रहेगा, लेकिन जुलाई से इसमें तेजी आने की उम्मीद है। इस साल 90-95% बारिश होने की संभावना है। केरल और कोस्टल कर्नाटक में बाढ़ जैसी स्थिति भी बन सकती है। जबकि, बिहार, झारखंड, उत्तरी कर्नाटक, विदर्भ, मराठवाड़ा और गुजरात के कई हिस्सों में कम बारिश होने की संभावना है।
पानी की कमी...
वहीं बारिश आने से पहले व मानसून में देरी के चलते उत्तर भारत में पड़ रही भीषण गर्मी के कारण पानी की किल्लत भी होने लगी है। मध्यप्रदेश के कई जिलों में जहां तालाब सुखने लगे हैं, वहीं इसके चलते लोगों को पानी मिलने में परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
वहीं राजस्थान के रेतीले इलाकों में तो जीना दुश्वार हो गया है, चुरू में पारा 50 डिग्री के निशान को भी पार कर 51 तक पहुंच चुका है। एक ओर जहां मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल में स्थिति बड़ा तालाब जो करीब 9 किलोमीटर बड़ा है, 10 सालों के अपने सबसे बुरे दौर से गुजर रहा है। इस बार यह काफी हद तक सूख गया है। वहीं राजस्थान के ही जोधपुर में तमाम जलाशय सूख चुके हैं। इससे ग्रामीण इलाकों में पानी का संकट और गहरा गया है।
केरल में मानसून की शानदार एंट्री...
मानसून ने आखिरकार केरल में शनिवार को दस्तक दे दी है। केरल में 8 दिन की देरी से पहुंचे मानसून के बाद यहां के तटीय इलाकों में बारिश शुरू हो गई। खबरों के मुताबिक केरल के कई हिस्सों में बारिश हो रही है।
अर्थव्यवस्था पर सीधा प्रभाव
जानकारों की मानें तो देश के अधिकांश ग्रामीण हिस्से चार महीने के मानसून के मौसम पर निर्भर करते हैं, जिसमें वार्षिक वर्षा का 75 प्रतिशत हिस्सा होता है एक अच्छे मानसून का अर्थव्यवस्था पर सीधा प्रभाव पड़ता है क्योंकि कृषि भारत की जीडीपी में प्रमुख योगदानकर्ता है।
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