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Friday, August 2, 2019

इंदिरा गांधी ने किया था रावतभाटा के इस डेम का उद्घाटन, अब रोज दाव पर लग रही सुरक्षा

कोटा/रावतभाटा.

आइरन लेडी के नाम से विख्यात देश की पहली महिला प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी द्वारा उद्घाटन किए इस डेम का आज भी उतना ही महत्व है, जितना राणा प्रताप सागर का। लेकिन, वर्तमान में इस डेम की सुरक्षा पर सवालिया निशान लगा हुआ है। प्रतिबंधित क्षेत्र होने के बावजूद यहां समाजकंटक घुस आते हैं। खुदा खैर करे, लेकिन कहीं बड़ी चूक हो गई और इसे नुकसान पहुंचा तो आसपास के क्षेत्र के लिए ऐसा संकट पैदा हो सकता है जिसकी कल्पना तक सिहरा दे।
सेडल डेम के नाम से पहचाने जाने वाले इस डेम का उद्घाटन 1970 में तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने किया था। यह एक तरह से राणा प्रताप सागर बांध का सेफ्टी वाल्व अथवा सेफ गार्ड मामना जाता है। इसी भूमिका के मद्देनजर इसका निर्माण भी हुआ। खैर, उद्घाटन के वक्त पीएम को ठहराने के लिए यहां पर रातों रात गेस्ट हाउस का निर्माण किया गया था, उसी में वे रुकी थी। डेम के दोनों तरफ फव्वारे लगाए गए थे। फव्वारे प्रतिदिन रंग-बिरंगी रोशनी बिखेरते थे। पूरे डेम पर दोनों तरफ रोशनी के लिए आकर्षक बिजली के खम्भे लगाए गए थे। यहां परिसर में एक गार्डन विकसित किया गया, जिसमें 12 प्रजाति के गुलाब के पौधे लगाए गए। इसके अलावा भी पार्क में कई प्रकार के पौधे लगाए गए थे।
24 घंटे होती थी चौकीदारी
यहां पर सुरक्षा व्यवस्था को लेकर चौकदार तैनात थे, जिनकी आठ-आठ घंटे की ड्यूटी होती थी। पौधों व गार्डन की देखभाल के लिए माली थे। धीरे-धीरे कर्मचारी सेवानिवृत्त हो गए। नए कर्मचारियों की भर्ती नहीं हुई। वर्तमान में डेम की सुरक्षा-व्यवस्था को लेकर मात्र एक चौकीदार है।
बजट नहीं आता
सिंचाई विभाग के अधिकारियों का कहना है कि डेम के रखरखाव को लेकर बजट नहीं आता है, जैसे तैसे मरम्मत भी करवा दें लेकिन बाद इसकी रखवाली करने वाला कोई नहीं। पंजाब से आए थे कारीगर 1970 से पहले यहां पर तत्कालीन अधिशासी अभियंता रामसिंह चौधरी थे। उन्होंने डेम का निर्माण कराने के लिए पंजाब से कारीगर बुलाए थे। फिर यहां पर मिट्टी का डेम बनाया गया था। इस बीच तत्कालीन प्रधानमंत्री गांधी द्वारा डेम का उद्घाटन करने की सूचना मिली। यहां परिसर में सीमेंट फैक्ट्री होती थी। उस फैक्ट्री को तोड़कर दो दिन में गेस्ट हाउस तैयार किया गया।

चौतरफा बदहाली ऐसी
गार्ड रूम में भरा भूसा :
डेम के मुख्य द्वार पर लोगों पर नजर रखने के लिए गार्ड रूम बना हुआ है। कभी यहां पर हर समय चौकीदार रहता था। अभी गाय व बैल को खिलाने के लिए भूसा भरा हुआ है।

परिसर लाइट्स खराब: पूरे परिसर में बड़ी-बड़ी लाइटें लगी हुई हैं लेकिन इनमें से एक भी चालू नहीं। परिसर में सफाई सफाई व पेड़ पौधों की रखवाली करने वाला कोई नहीं है। बारिश व तेज आंधी के कारण पेड़ का कुछ हिस्सा गिर गया है, जगह-जगह कचरा पड़ा हुआ है लेकिन उसे साफ करने वाला कोई नहीं है।

फव्वारे बेजान: डेम के दोनों तरफ फव्वारें लगाए हुए हैं। एक फव्वारा नावनुमा है। इनमें रोशनी के लिए बिजली के आकर्षक खम्भे लगे थे, देखरेख व रखरखाव के अभाव में लाइटें व फव्वारे खराब हो गए। समाजकंटक लाइटें उखाड़ ले गए।
अंधेरा होते ही शराब पार्टियां: यह क्षेत्र प्रतिबंधित है। भैंसरोडगढ़ वन्य जीव अभयारण्य ने भी लोगों के आने जाने पर रोक लगा रखी है। इसके बावजूद समाजकंटक घुस जाते हैं। डेम पर जाने के लिए एक जगह दीवार का हिस्सा तोड़ दिया गया है। मुख्य द्वार पर ताला लगा है, डेम के पास बने लोहे के गेट को भी पत्थर रखकर बंद कर दिया गया है। फिर भी लोग दीवार फांदकर आ जाते हैं। अंधेरा होने के बाद यहां शराब पार्टियां करते हैं।
टपकती छतें, टीनशेड टूटा: डेम के ऊपर बने गेस्ट हाउस परिसर में लगे शेड को बन्दरों ने तोड़ दिया है। चौकीदार ने बताया कि गेस्ट हाउट की छतें कई जगह से टपकती हैं। शेड निर्माण को लेकर उच्चाधिकरियों को भी अवगत कराया गया है लेकिन कोई बात नहीं बनी।

दोनों विभागों के खुदगर्जी तर्क
इस डेम के लिए जवाबदेह दो विभाग हैं। पहला सिंचाई विभाग और दूसरा विद्युत उत्पादन निगम यानी पन बिजलीघर प्रशासन। पत्रिकाडॉटकॉम ने दोनों के जिम्मेदार अधिकरियों से इस बारे में बातचीत की तो उनके सुर अलग दिखे।
सिंचाई विभाग के रावतभाटा खंड अधिशासी अभियंता पीसी मेघवाल का कहना है कि डेम की रखवाली की जिम्मेदारी विद्युुत उत्पादन निगम की है। इसको लेकर निगम से डेम की सुरक्षा को लेकर तीन गन मैनों की मांग की थी लेकिन कोई जवाब नहीं आया। गन मैन उपलब्ध नहीं कराए गए। वे यह जरूर जोड़ते हैं कि यदि दीवार टूटी होने से लोग घुस आते हैं तो उसे विभाग ठीक करा देगा।
उधर, पनबिजलीघर के अधिशासी अभियंता संजय पालीवाल का कहना है कि गार्डों का नया टेन्डर हुआ है। सेडल डेम पर गार्ड लगाने के लिए लिखा जाएगा। यदि स्वीकृति मिलती है तो यहां भी तीन गार्ड लगा दिए जाएंगे।



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