भोपाल. प्रदेश में भाजपा शासनकाल के दौरान पिछले 15 सालों में हुए तमाम आवास आवंटनों की जांच कमलनाथ सरकार कराएगी। इसके लिए कैबिनेट सब कमेटी का गठन किया गया है। इस कमेटी में मुख्यमंत्री कमलनाथ ने अपने करीबी मंत्रियों को रखा है। यह कमेटी भाजपा के अनुषांगिक संगठन विश्व संवाद केंद्र, संस्कृत भारती, विद्या भारती सहित अन्य संस्थाओं को आवंटित आवासों की वैधता भी जांचेगी। सरकार को आशंका है कि 2003 से 2018 के बीच मानकों को दरकिनार कर आवास आवंटित किए गए हैं। ऐसे आवासों को खाली कराया जाएगा।
दरअसल, भाजपा सरकार के समय कई पार्टी नेताओं को विभिन्न जरियों से आवास आवंटित कर दिए गए, जबकि वे इसकी पात्रता नहीं रखते थे। इसमें भाजपा के दूसरी व तीसरी पंक्ति के नेता शामिल हैं। कुछ नेताओं को पत्रकार कोटे से भी आवास दिए गए हैं। अनुषांगिक संगठनों के मामले में भी यही स्थिति है। डी और ई-टाइप के बंगले इन संगठनों को बिना निर्धारित पात्रता पूरी करे बांटे गए। तत्कालीन मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने विशेषाधिकार के तहत आवंटन किया था। अब कांग्रेस सरकार इसकी स्क्रूटनी करेगी।
- अवधि पूरी, कब्जा बरकरार
रसूखदारों को दिए गए अधिकतर सरकारी आवासों के आवंटन की अवधि पूरी हो चुकी है, लेकिन उन्हें खाली नहीं कराया गया। कई जगह आवंटन का नवीनीकरण भी नहीं किया गया। इसके अलावा पुराना बकाया भी लंबित है, लेकिन रसूख के चलते कब्जा जमा हुआ है। अब बकाया और अवधि पूरी होने वाले आवंटन को भी सूचीबद्ध किया जाएगा। इसमें भी भाजपा से जुड़े आवास खाली कराए जा सकते हैं।
- आवास की कमी से दिग्गज परेशान
सरकारी आवासों की कमी के कारण सरकार परेशान है। कांग्रेस के कई नेताओं को आवास चाहिए, लेकिन अच्छे आवास की कमी के कारण उन्हें आवंटन नहीं हो सका है। यहां तक कि पूर्व केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया और राज्यसभा सदस्य विवेक तन्खा को भी आवास आवंटित नहीं हो पाया है।
- जांच के ये तीन प्रमुख बिंदु
गैर-शासकीय व्यक्तियों को आवंटन में नियमों का पालन।
भविष्य में गैर-शासकीय व्यक्ति को आवंटन के नए मापदंड।
शासकीय आवास आवंटन से संबंधित अन्य मुद्दे।
- ये हैं कैबिनेट सब कमेटी में
लोक निर्माण मंत्री सज्जन सिंह वर्मा, गृहमंत्री बाला बच्चन, वन मंत्री उमंग सिंघार, नगरीय प्रशासन जयवर्धन सिंह और वित्त मंत्री तरुण भनोत कैबिनेट सब कमेटी में शामिल हैं। गृह विभाग के प्रमुख सचिव एसएन मिश्रा समिति के संयोजक हैं। सज्जन, बाला और तरुण कमलनाथ के कोर ग्रुप से हैं, जबकि उमंग भी इन दिनों कमलनाथ से नजदीकी बढ़ा रहे हैं।
- इनके आवासों की भी होगी जांच
हाल ही में सरकारी कर्मचारियों को आवास देने के मामले में सीएम के विशेषाधिकार के तहत आउट ऑफ टर्न फर्जी आवंटन का बड़ा घोटाला सामने आया है। उसमें 50 हजार से एक लाख रुपए तक लेकर फर्जी पत्र के आधार पर आवंटन कर दिए गए। इसकी जांच चल रही है। गैर-सरकारी व्यक्तियों को आवंटन में ऐसा घोटाला न किया गया हो, इसकी भी जांच की जाएगी। इसके लिए विशेषाधिकार के तहत आवंटित प्रकरणों की अलग से स्क्रूटनी होगी। बड़ी संख्या में नेता, पत्रकार, सामाजिक कार्यकर्ता, कलाविद्, साहित्यकार व अन्य गणमान्य नागरिकों को आवास आवंटित हुए हैं। इनके आवंटन की भी जांच की जाएगी।
अभी कमेटी बनी है। बैठक बुलाकर आवंटन की स्थिति को देखा जाएगा। यदि कहीं कुछ गलत हुआ है तो उसे सही किया जाएगा। कमलनाथ सरकार भेदभाव नहीं करती, लेकिन भाजपा शासनकाल में ऐसा हुआ है। हम राजनीतिक नजरिए से काम नहीं कर रहे हैं।
- बाला बच्चन, गृहमंत्री
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