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Sunday, September 8, 2019

जर्जर भवनों में पढऩे को मजबूर नौनिहाल, 108 स्कूल भवन चिन्हित, शिक्षा विभाग के अधिकारी मौन

सवाईमाधोपुर. सरकार भले ही ग्रामीण क्षेत्रों में संचालित सरकारी स्कूलों में सभी मूलभुत सुविधाएं उपलब्ध करवाने का दावा कर रही हो, लेकिन जमीनी हकीकत कुछ ओर ही बयां कर रही है। शिक्षा अधिकारियों की अनदेखी से स्कूलों की इमारतों की दशा सुधरने का नाम नहीं ले रही है। खासतौर पर ग्रामीण अंचलों के अधिकांश सरकारी भवन की हालत जर्जर हो चुकी है, लेकिन नौनिहाल बच्चे जर्जर स्कूल भवन में ही शिक्षा पाने को मजबूर है। कुछ स्कूलों में छत गिर चुकी हे, तो कहीं जगह कमरों में दरारें पड़ चुकी हैं। ऐसे हालात एक या दो नहीं बल्कि जिले में 108 सरकारी स्कूलों के बने है।

इन स्कूलों में ज्यादा स्थिति खराब
जिले कुण्डेरा के राजकीय आदर्श उमावि, शेरपुर, अजनोटी, भाड़ौती, कुस्तला बालिका स्कूल, बरनावदा सहित कई स्कूलों में की बिल्डिंग ज्यादा खराब है। यहां कक्षा-कक्षों में दरारें आ रही हैं, तो कहीं पर दीवारों से प्लास्टर एवं लोहे के गेट तक उखड़े पड़े हैं।

होती है कागजी खानापूर्ति
शिक्षा विभाग की ओर से जिले में हर वर्ष बारिश से पूर्व जर्जर बिल्डिंग व कक्षा-कक्षों की सूचनाएं मांगी जाती है, लेकिन केवल कागजी खानापूर्ति ही की जाती है। इसके लिए जिला शिक्षा अधिकारियों को आदेश भी दिए गए थे। हालांकि जिले के जर्जर इमारतों, जर्जक कक्षा-कक्षा की जानकारी जिले से उच्चाधिकारियो को भेजी जाती है, लेकिन नतीजा कुछ नहीं रहता है। सूचनाएं भेजने के बाद भी सरकार की ओर से मरम्मत के लिए ना तो प्रस्ताव लिए जाते है और ना ही स्कूलों में बजट आता है।

केवल माध्यमिक स्कूलों की मांगी सूचना
जिला मुख्यालय पर करीब दो महीने कलक्टर की अध्यक्षता में हुई बैठक में सूचनाएं मांगी गई थी। इस दौरान केवल माध्यमिक स्कूलों के 108 स्कूलों की सूचनाएं ही समग्र शिक्षा अभियान कार्यालय में सिविल शाखा को मिली है, जबकि प्रारंभिक स्कूलों में भी दर्जनों स्कूल जर्जर भवनों में ही चल रहे हैं।

नहीं है पर्याप्त कमरे
सरकारी स्कूलों में नामांकन तो बढ़ गया, लेकिन विद्यार्थियों को पढ़ाई कराने के साथ बैठक व्यवस्था के लिए स्कूलों के पास भी पर्याप्त रूप से कमरे नहीं है। साथ ही जिन स्कूलों के पास कमरे है और जर्जर अवस्था में है। उन स्कूलों में संस्था प्रधानों को कक्षा-कक्ष का संचालन करने की मजबूरी बन गया है। इससे पढ़ाई की व्यवस्थाएं भी चौपट होती हैं।


ये मांगी गई थी सूचना

जिले के सभी स्कूलों में जर्जर भवनों की सूचनाएं मुख्य जिला शिक्षा अधिकारी ने सभी मुख्य ब्लॉक शिक्षा अधिकारियों से मांगी थी लेकिन जिला मुख्यालय पर समग्र शिक्षा अभियान कार्यालय पर केवल माध्यमिक स्तर के जर्जर भवनों की सूचनाएं ही आई हैं। इस दौरान विभाग ने राजकीय माध्यमिक व उमावि की संख्या, संचालित कुल कक्षाएं, नामांकन, उपलब्ध कक्षा-कक्ष, कक्षा संचालन योग्य कक्ष, जर्जर कक्षा-कक्ष, मरम्मत योग्य कक्षा-कक्ष, आवश्यक नए कक्षा-कक्षों की संख्या आदि की सूचना मांगी थी।

इनका कहना है...
शिक्षा निदेशालय ने जिले में सरकारी स्कूलों में जर्जर भवन व कक्षा-कक्षों की सूचना मांगी थी। इस दौरान 108 माध्यमिक स्कूलों की सूचना भेजी गई है। आदेश व बजट आने के बाद ही जर्जर भवनों व कक्षा-कक्षों की मरम्मत कराई जाएगी।
अरुण शर्मा, सहायक अभियंता, सिविल शाखा, समसा

फोटो कैप्शन

एसएम0909सीए-कुण्डेरा के राजकीय आदर्श उमावि के एक कमरे में दीवार से उखड़ा प्लास्टर।
एसएम0909सीबी-कुण्डेरा के राउमावि में दीवार पर आई दरारें व क्षतिग्रस्त कक्ष का गेट।

एसएम0909सीसी-कुण्डेरा के राउमावि में एक कक्ष की दीवार पर आई दरार।



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