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Saturday, April 20, 2019

लद्दाख में 11 हजार वर्ष पूर्व भी थे मानव के अस्थायी आवास

भोपाल। विश्व धरोहर दिवस पर राज्य संग्रहालय ने लोगों में पुरातात्विक धरोहरों के प्रति जागरुकता लाने के लिए ग्वालियर राज्य के पुरातत्वीय महत्व पर केंद्रित छायाचित्र प्रदर्शनी, चित्रकला प्रतियोगिता और व्याख्यान का आयोजन किया गया।

ग्वालियर राज्य के ग्लास निगेटिव से तैयार छायाचित्रों की प्रदर्शनी आकर्षण का केंद्र रही। व्याख्यान में लद्दाख हिमालय की प्रागैतिहासिक पृष्ठभूमि-जम्मू और कश्मीर विषय पर दिल्ली के पूर्व संयुक्त महानिदेशक भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण डॉ. एसबी ओता ने बताया कि लद्दाख क्षेत्र शुरू से ही बौद्ध धर्म का बड़ा केंद्र रहा है।

आरंभिक शोध कार्य भी यहां के बौद्ध मठों पर ही किए गए। शोध कार्यों से प्रतीत होता है कि इन मठों से पूर्व शायद यहां मानवीय गतिविधियां नहीं थीं। उन्होंने कहा कि लद्दाख जैसे दुर्गम स्थान में भी प्रागैतिहासिक मानव अवशेष मिलते हैं।

अत्यधिक ठंडा स्थान होने के कारण यहां मनुष्य ने अपना आवास जमीन के अंदर गड्डा खोदकर बनाया

इस क्षेत्र में उत्खनन से 11 हजार वर्ष पूर्व के अस्थाई आवास के प्रमाण मिले हैं। इनमें पत्थर और जानवरों की हड्डियों से निर्मित औजार काफी रोचक हैं। इनका उपयोग दैनिक कार्यों के अलावा जानवरों के शिकार के लिए किया जाता था। अत्यधिक ठंडा स्थान होने के कारण यहां मनुष्य ने अपना आवास जमीन के अंदर गड्डा खोदकर बनाया।

चारकोल से प्राप्त प्रमाणों से यह निश्चित हो जाता है कि एक ही स्थान पर मानव ने बार-बार अस्थाई बस्ती बसाई। इस क्षेत्र में विभिन्न स्तरों से लिए गए सेंपल एवं सभी पुरातात्विक साक्ष्य इस बात की पुष्टि करते हैं कि हजारों वर्ष पूर्व इस क्षेत्र में मानव की गतिविधियां होती रही हैं।

राग भीमपलासी की पेश

बनारस घराने की विख्यात गायिका सुनंदा शर्मा का गायन हुआ। गिरिजा देवी की शिष्या सुनंदा ने गायन के लिए विशेष रूप से दुर्लभ राग और बंदिशें चुनीं। उनके साथ तबले पर जयशंकर सहजपाल और हारमोनियम पर मजीद खान ने संगत की। उन्होंने राग भीमपलासी के विस्तार को चुना। राग बिहाग में दुर्लभ तराना प्रस्तुत किया गया।

खमाज में ठुमरी ठाड़े रहो बांके श्याम की बनक अनूठी, टप्पा चैती दादरा गंगा रेती पे बंगला... ने श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। इसके पूर्व सुबह राज्य संग्रहालय में बच्चों की चित्रकला प्रतियोगिता आयोजित हुई, जिसमें करीब दो सौ बच्चों ने हिस्सा लिया और हमारी धरोहर विषय पर चित्र बनाए।

चित्रों में ग्वालियर की धरोहर

राज्य संग्रहालय की प्रदर्शनी दीर्घा में ग्वालियर स्टेट - ग्लास निगेटिव विषय पर केंद्रित प्रदर्शनी का आयोजन किया गया। इसमें 64 चित्रों को प्रदर्शित किया गया है। एग्जीबिशन में दिखाया गया कि कैसे ग्वालियर राज्य के पुरातत्व विभाग की स्थापना 1914 में हुई।

38 लाइन की संस्कृत भाषा का अभिलेख किया प्रदर्शित एग्जीबिशन में गूजरी महल संग्रहालय में रखी नटराज मिडालियन की प्रतिमा की फोटो को एग्जीबिट किया गया। वहीं चंदेरी में पंचमनगर महल की फोटो को प्रदर्शित किया है।

प्रदर्शनी में 38 लाइन का संस्कृत भाषा में लिखे अभिलेख को प्रदर्शित किया गया है। यह अभिलेख तीन भागो में टूटा हुआ है, जो कि ग्यारसपुर में प्राप्त हुआ था, यह लगभग 10वीं शती ई के समय का है। प्रदर्शनी 25 अप्रेल तक दर्शकों के लिए नि:शुल्क रहेगी।



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